अहलेबैत (अ) समाचार एजेंसी अबना की रिपोर्ट के अनुसार आगामी कुछ दिनों में ईरान में एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन हो रहा है साथ ही संयुक्त राष्ट्र के बाद दूसरी सबसे बड़ी राजनीतिक संस्था की अध्यक्षता ईरान को सौंप दी जाएगी।गुट निरपेक्ष आंदोलन क्या है? ईरान की मेजबानी के क्या लाभ होंगे?26 अगस्त 2012 को तेहरान में गुट निरपेक्ष आंदोलन के प्रमुखों के सोलहवीं बैठक का आयोजन हो रहा है जिसमें 120 सदस्य और कार्यवाहक भाग लेंगे। जिसका आयोजन विश्व समानता पर ईरान के प्रभाव और राजनीतिक और अंतरराष्ट्रीय क्षेत्रों में इस्लामी गणतंत्र की उपयोगिता को दर्शाता है।निम्न में गुट निरपेक्ष आंदोलन की संक्षिप्त कथा अर्थात इतिहास और तेहरान में आयोजित होने वाली सोलहवीं बैठक की रिपोर्ट पेश की जा रही है:गुट निरपेक्ष आंदोलन किया है?गुट निरपेक्ष आंदोलन जिसे अंग्रेज़ी में (Non-Aligned Movement) अरबी भाषा में (حرکة عدم الانحیاز) और फ़ांसवी भाषा में (Le Mouvement Non-Aligné) कहा जाता है राष्ट्रों की एक अंतर्राष्ट्रीय संस्था है, जिसकी आधारशिला 1961 ईसवी यानी 1340 हिजरी शम्सी में समय डाली गई जब शीत युद्ध और पूर्व और पश्चिम के बीच द्विध्रुवी वातावरण अपने अपने चरम पर था।इस आंदोलन के गठन का उद्देश्य ऐसे देशों के बीच एकता व गठबंधन पैदा करना था जो न कम्यूनिज़्म (पूर्वी ब्लॉक) की ओर आकर्षित थे और न पूंजीवादी प्रणाली (पश्चिम ब्लॉक) की ओर. पूर्व और पश्चिम के बीच शीत युद्ध के ज़माने में गुट निरपेक् आंदोलन के संस्थापकों ने कोशिश की कि दोनों मोर्चों से पूरी तरह जुदा रहने पर बल देते हुए न्याय व इंसाफ़ की आवश्यकताओं को पूरा करते हुए तीसरी दुनिया के देशों का समर्थन करें और इस आंदोलन को किसी तरह संयुक्त राष्ट्र एक बदल बना दें।उन्होंने निश्चय किया है, कि विश्व के वे किसी भी पावर ब्लॉक के संग या विरोध में नहीं रहेंगे। यह आंदोलन भारत के प्रधान मंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू, मिस्र के पूर्व राष्ट्रपति जमाल अब्दुल नासर एवं युगोस्लाविया के राष्ट्रपति जोसिप ब्रॉज़ टीटो का आरंभ किया हुआ है। इसकी स्थापना अप्रैल, १९५५ में हुई थी अर २००७ तक तक इसमें ११८ सदस्य हो चुके थे।हवाना घोषणा-१९७९ के अनुसार इस संगठन का उद्देश्य गुट-निरपेक्ष राष्ट्रों की राष्ट्रीय स्वतंत्रता, सार्वभौमिकता, क्षेत्रीय एकता एवं सुरक्षा को उनके साम्राज्यवाद, कोलोनियलिज़्म, जातिवाद, रंगभेद एवं विदेशी आक्रमण, सैन्य अधिकरण, हस्तक्षेप आदि मामलों के विरुद्ध उनके युद्ध के दौरान सुनिश्चित करना है। इसके साथ ही किसी पावर ब्लॉक के पक्ष या विरोध में ना होकर निष्पक्ष रहना है। ये संगठन संयुक्त राष्ट्र के कुल सदस्यों की संख्या का लगभग २/३ एवं विश्व की कुल जनसंख्या के ५५% भाग का प्रतिनिधित्व करता है। खासकर इसमें तृतीय विश्व यानि विकासशील देशसदस्य हैं।ईरान, जो कि सेंट के सेंट्रल संधि संगठन का हिस्सा होने और शाह की पश्चिम ब्लॉक से वचन के कारण इस आंदोलन का हिस्सा बनने से वंचित रह गया था, वर्ष 1979 ईसवी में इस्लामी क्रांति की महान सफलता के बाद गुट निरपेक्ष आंदोलन से संबद्ध हो गया।शीत युद्ध के अंत और पूर्वी ब्लॉक के पतन के साथ ही गुट निरपेक्ष आंदोलन के कुछ सदस्य देश एक तरह फ़रामोशी का शिकार हो गए. उनका मानना था कि इस आंदोलन का मुख्य कारण - यानी शीत युद्ध के दौरान दो बड़ी शक्तियों की नकारात्मक स्थिरता - समाप्त हो चुका है। लेकिन वर्तमान दुनिया के तथ्यों के मद्देनजर यह आंदोलन अब भी "साम्राज्यवाद विरोधी" और "स्वतंत्रता" के दृष्टिकोण के साथ अपनी गतिविधियों जारी रखे हुए है जिसके अक्सर सदस्य विकासशील देश हैं .फिलहाल ईरान सहित दुनिया के 118 देश इस आंदोलन से जुड़े हैं जो संयुक्त राष्ट्र की दो तिहाई संख्या से अधिक है।गुट निरपेक्ष आंदोलन के सदस्य देशों के प्रमुखों की बैठक हर तीन साल में एक बार इसी शीर्षक के अंतर्गत होती है जिसकी अध्यक्षता मेजबान देश करता है।वर्तमान सदस्यःईरान, आज़रबाईजान, मध्य अफ्रीका, दक्षिण अफ्रीका, अफगानिस्तान, अल्जीरिया, इक्वाडोर, अंगोला, इन्टीगवा और बारबोडा, बहामाज़, बहरैन, बांग्लादेश, बारबाडोस, बेलारूसी, बीलीज़, बरोनाई, बेनिन, भूटान, बोलीविया, बोटसवाना, बरकीना फ़ासो , बरविंडी, पाकिस्तान, सऊदी अरब, कंबोडिया, कैमरून, केप वरदे, जबूती, चाड, आईवरी कोस्ट, चिली, कोलम्बिया, कोमोरोस, कांगो गणराज्य, कांगो, क्यूबा, इक्वेटोरियल गिनी, डोमिनिका, डोमिनिकन गणराज्य, भारत, मिस्र, म्यांमार, नाइजीरिया आदि।कार्यवाहक देशःअर्जेंटीना, आर्मेनिया, यूक्रेन, यूरागोए, अल सलोडोर, बोस्निया और हरज़ीगोवीना, ब्राजील, ताजिकिस्तान, चीन, कोस्टा रिका, क्रोएशिया, साइप्रस, कज़ाकिस्तान, करगिज़तान, मेक्सिको, मोंटी नीगरो, नीदर लैंड, पईरागोए, पोलैंड, रूस, सर्बिया......गुट निरपेक्ष आंदोलन के मजबूत पहलू:"सदस्यों की संख्या के आधार पर संयुक्त राष्ट्र के बाद सबसे बड़ा संगठन", "अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी में आंदोलन के सदस्यों की धाक", "सुरक्षा परिषद और संयुक्त राष्ट्र में सदस्यों की धाक", "सदस्य देशों के नागरिक राज्यों और सदस्य देशों की प्रक्रिया को उजागर करना ", विकसित देशों के पर्यावरण के सामने मौजूद खतरों से सदस्य देशों की तुलना," आंदोलन के सदस्यों की व्यक्तिगत क्षमताएं।"गुट निरपेक्ष आंदोलन के सामने चुनौतियां और उनके कमजोर बिन्दु:"सदस्यों के लक्ष्यों और राजनीतिों में असहमति", "अरबी देशों में होने वाली परिवर्तन", "मध्य एशियाई देशों की चीन के तरफ रूझान", "अमेरिका से दोबारा अनुलग्नक से संबंधित लातीनिय अमेरिका के कुछ देशों की कोशिश" , "वैश्विक आर्थिक संकट और मध्य पूर्व और अफ्रीका के बाज़ारों का ख़तरा", "सदस्यों के लिए बड़ी कुदरतों की ओर से अधिरोपण होने वाले प्रस्तावों के पाइबंदी की शर्त"।गुट निरपेक्ष आंदोलन के सदस्य और बैठकें:1. शिखर सम्मेलन (आंदोलन के सबसे उच्च स्तरीय सदस्यों की बैठक हर तीन साल बाद एक सदस्य देश में आयोजित होगी);2. विदेशमंत्रियों की बैठक (हर साल);3. विशेषज्ञों की बैठक (हर साल);4. संपर्क कार्यालय की बैठक (हर साल);5. विशेष सभाएं (विभिन्न समय में)।गुट निरपेक्ष आंदोलन के शिखर सम्मेलन का इतिहास:पहला सम्मेलन: बलगराद (युगोस्लाविया), 1-6 सितम्बर 1961;दूसरा सम्मेलन: काहिरा (मिस्र), 5-10 अक्तूबर 1964;तीसरा सम्मेलन: लोसाका (ज़ाम्बिया), 8-10 सितम्बर 1970;चौथा सम्मेलन: अल जज़ीरा (अल्जीरिया), 5-9 सितम्बर 1973;पांचवां सम्मेलन: कोलंबो (श्रीलंका), 16-19 अगस्त 1976;छठा सम्मेलन: ह्वाना (क्यूबा), 3-9 सितम्बर 1979;सातवां सम्मेलन: नई दिल्ली (भारत), 7-12 मार्च 1983;आठवां सम्मेलन: हरारे (ज़िम्बाब्वे), 1-6 सितम्बर 1986,नवां सम्मेलन: बुलगराद (युगोस्लाविया), 4-7 सितम्बर 1989;दसवां सम्मेलन: जकार्ता (इंडोनेशिया), 1-7 सितम्बर 1992;ग्यारहवाँ सम्मेलन: कार्टगीना (कोलम्बिया), 18-20 अक्तूबर 1995;बारहवाँ सम्मेलन: डरबन (दक्षिण अफ्रीका), 2-3 सितम्बर 1998;तेरहवाँ सम्मे
गुट निरपेक्ष आंदोलन का सोलहवाँ शिखर सम्मेलन-6
गुट निरपेक्ष आंदोलन क्या है? ईरान की मेज़बानी के क्या लाभ हैं?
20 अगस्त 2012 - 19:30
समाचार कोड: 338269
आगामी कुछ दिनों में ईरान में एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन हो रहा है साथ ही संयुक्त राष्ट्र के बाद दूसरी सबसे बड़ी राजनीतिक संस्था की अध्यक्षता ईरान को सौंप दी जाएगी..........